एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार एसईसीएल की गेवरा परियोजना एक बार फिर कथित दबंगई और वर्चस्व की जंग का गवाह बनी है। कोयला लिफ्टिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलेआम हिंसा, तोड़फोड़ और धमकियों तक पहुंच गया है। आरोप है कि बीती रात खदान परिसर में के.के. ग्रुप से जुड़े कथित लोगों ने न केवल प्रतिद्वंद्वी कंपनी के कर्मचारियों के साथ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि इसके बाद उग्र भीड़ के रूप में पहुंचकर एक थार वाहन को लाठी-डंडों से क्षतिग्रस्त किया और दो व्यक्तियों के साथ मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

हैरत की बात यह है कि खदान क्षेत्र में यह सब कुछ सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुआ, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। वायरल हो रहे वीडियो में 30–40 लोगों की भीड़ को थार गाड़ी पर हमला करते हुए साफ देखा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह भीड़ खदान में हुई झड़प के बाद कथित तौर पर के.के. ग्रुप से जुड़ी बताई जा रही है, जिसने मौके पर पहुंचकर उत्पात मचाया।
बताया जा रहा है कि कोयला लिफ्टिंग के दौरान पहले तीखी नोकझोंक हुई और फिर कथित बाउंसरों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया, जिसमें केसीपीएल कंपनी के कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। खदान परिसर के भीतर हुई इस हिंसा से कामगारों में दहशत का माहौल है और उत्पादन कार्य भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि गेवरा में लंबे समय से कुछ निजी समूहों का कथित दबदबा रहा है, जिसके चलते आए दिन तनाव की स्थिति बनती रहती है। यह घटना पाली क्षेत्र में पिछले वर्ष हुए उस खूनी टकराव की याद दिलाती है, जिसमें एक ट्रांसपोर्टर की जान चली गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि आरोपितों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो दीपका–गेवरा बेल्ट में हालात और बिगड़ सकते हैं। सवाल साफ है—क्या खदानें कानून से ऊपर हैं, या फिर अब कथित कोल माफियाओं पर निर्णायक कार्रवाई का वक्त आ गया है?
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